सूरजपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) की प्रतिपूर्ति राशि हड़पने के लिए नोडल प्राचार्य की लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अब सवाल उठ रहा है – क्या यह वाकई साइबर हैकिंग है या फिर अधिकारियों और स्कूल संचालकों की मिलीभगत का नतीजा?
अब तक सामने आया मामला
जानकारी के मुताबिक, कुछ निजी स्कूल संचालकों ने 31 जुलाई 2025 को नोडल प्राचार्य की आईडी से बिना अनुमति दावा सत्यापन कर लिया। इस अनियमितता पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने चार स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है:
- इंडियन पब्लिक स्कूल (हिंदी व अंग्रेजी माध्यम, मानी)
- गुरुकुल पब्लिक स्कूल (हिंदी व अंग्रेजी माध्यम, कुरुवां)
- ओमकार पब्लिक स्कूल (अंग्रेजी माध्यम, कोरिया)
- ज्ञानगंगा पब्लिक स्कूल (अंग्रेजी माध्यम, कुरुवां)
डीईओ ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए चेतावनी दी है कि अगर जवाब नहीं मिला तो इन स्कूलों की प्रतिपूर्ति राशि की फाइलें उच्च कार्यालय नहीं भेजी जाएंगी।
कागजी स्कूलों का खेल
सूत्रों के मुताबिक, इन चार में से केवल इंडियन पब्लिक स्कूल ही वास्तव में संचालित है। बाकी तीन स्कूल सिर्फ कागजों पर चलाए जा रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से शिक्षा माफिया विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से आरटीई की करोड़ों की राशि का बंदरबांट कर रहे हैं।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मामला साइबर अपराध जैसा गंभीर है, तो एफआईआर दर्ज कर जांच साइबर सेल को क्यों नहीं सौंपी गई? केवल नोटिस देकर मामला दबाने की कोशिश क्यों हो रही है?
पुराने दाग, पुराने विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब सूरजपुर का शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आया हो। पहले भी कागजी स्कूलों और रिश्वतखोरी के मामलों में डीईओ और अन्य अधिकारी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई झेल चुके हैं। लेकिन उसके बाद भी जांच के नाम पर लीपापोती का सिलसिला जारी रहा है।
जनता में आक्रोश, उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच अब नाराज़गी साफ दिख रही है। लोग पूछ रहे हैं:
- क्या यह असली साइबर हैकिंग है या अंदरूनी मिलीभगत?
- पुलिस शिकायत क्यों दर्ज नहीं हुई?
- क्या नोटिस केवल दिखावटी कार्रवाई है?
जनचर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि यह मामला कहीं आरटीई पर दबाव बनाने या कुछ स्कूलों को फायदा पहुंचाने की साजिश तो नहीं।
आखिर सच क्या है?
नोडल प्राचार्य की आईडी का इतना बड़ा दुरुपयोग बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं लगता। अब देखना यह होगा कि जांच सच में दोषियों तक पहुंचेगी या फिर हमेशा की तरह बहानों और नोटिस की आड़ में दबा दी जाएगी।