सूरजपुर | विशेष संवाददाता सूरजपुर जिले में शिक्षा विभाग की “मनमानी व्यवस्था” एक बार फिर बेनकाब हो गई है। शासकीय उमावि रामनगर में नियमित व्याख्याता का पद खाली नहीं होने के बावजूद अतिथि शिक्षक की नियुक्ति कर दी गई। यह पूरा मामला अब PMO तक पहुँच चुका है, जिसके बाद जांच के आदेश जारी होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी विषय के लिए विद्यालय में स्वीकृत और नियमित व्याख्याता का पद मौजूद था, फिर भी अक्टूबर 2022 में नियमों को दरकिनार कर अतिथि शिक्षक की नियुक्ति कर दी गई। न कोई पारदर्शी प्रक्रिया, न शासन की अनुमति और न ही विभागीय नियमों का पालन — सीधे मनमाने आदेश से नियुक्ति।
शिकायत दबाने की कोशिश, पर सच बाहर आया
पीड़ित शिक्षक का आरोप है कि जब इस अवैध नियुक्ति पर सवाल उठाए गए, तो शिकायत को दबाने की कोशिश की गई, फाइलें आगे नहीं बढ़ाई गईं और महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन मामला जब PMO कार्यालय तक पहुँचा, तब जाकर जांच के निर्देश देने पड़े।
शासकीय धन की लूट और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
नियमित पद होते हुए अतिथि शिक्षक की नियुक्ति से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा, बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह नियुक्ति सिर्फ लापरवाही थी या फिर किसी खास को फायदा पहुँचाने की साजिश?
अब कटघरे में अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह देखा जाएगा कि:
- अतिथि शिक्षक की नियुक्ति किसके आदेश पर हुई
- नियमित पद होने की जानकारी होते हुए भी नियुक्ति क्यों की गई
- किस अधिकारी ने नियमों की अनदेखी की
- क्या छत्तीसगढ़ शिक्षा सेवा नियम एवं 1988 के अधिनियम का उल्लंघन हुआ
यदि आरोप सही पाए गए तो नियुक्ति रद्द होने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
एक मामला नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
यह प्रकरण अकेला नहीं माना जा रहा। शिक्षा विभाग में पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अक्सर “जांच चल रही है” कहकर मामले ठंडे कर दिए जाते हैं।
अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट सच्चाई सामने लाती है या फिर यह फाइल भी बाकी फाइलों की तरह दफ्तरों में धूल फांकती रह जाएगी।